
बक्सर। चौसा में निर्माणाधीन 1320 मेगावॉट थर्मल पावर प्लांट में कार्यरत मजदूरों ने शुक्रवार की सुबह प्लांट के मेन गेट पर पहुंचकर जमकर प्रदर्शन किया। हजारों मजदूरों के गेट पर एकत्रित होने से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि बाद में मजदूर नेताओं के समझाने पर सभी मजदूर वापस अपने-अपने लेबर कॉलोनियों में लौट गए।
मजदूरों द्वारा अपनी 11 सूत्री मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने से पावर प्लांट का निर्माण कार्य प्रभावित हो गया है। एलएनटी, पॉवरमेक सहित विभिन्न कंपनियों के हजारों मजदूर पांचवें दिन भी काम का बहिष्कार करते हुए हड़ताल पर डटे रहे।
मजदूरों का कहना है कि ठेकेदारों द्वारा न्यूनतम मजदूरी अधिनियम का पालन नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा अतिरिक्त कार्य अवधि का नियमानुसार भुगतान नहीं किया जाता है तथा मजदूरों को समय पर वेतन भी नहीं दिया जा रहा है। मजदूरों ने आरोप लगाया कि अतिरिक्त कार्य अवधि को मूल कार्य अवधि में जोड़कर नियम विरुद्ध कार्य दिवस बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक कंपनी उनकी मांगों को नहीं मानती, तब तक कार्य का बहिष्कार जारी रहेगा।
प्रदेश महासचिव, इंटक बिहार प्रदेश रामप्रवेश सिंह यादव ने बताया कि वर्षों से चौसा पावर प्लांट के मजदूरों का शोषण किया जा रहा है। मजदूरों को बोर्ड रेट के अनुसार भुगतान नहीं किया जा रहा है और आठ घंटे के बजाय 12 घंटे काम कराया जाता है, लेकिन उसका ओवरटाइम नहीं दिया जाता। साथ ही मजदूरों को नियमित रूप से वेतन भी नहीं मिल रहा है और तीन-तीन माह बाद भुगतान किया जाता है।
उन्होंने कहा कि इन्हीं मांगों को लेकर हजारों मजदूर लेबर कॉलोनियों में रहकर कार्य का बहिष्कार कर रहे हैं। मजदूरों की सभी मांगें जायज हैं और इस मामले में जिला प्रशासन को भी पहल करनी चाहिए, ताकि मजदूरों की समस्याओं का समाधान हो सके।




