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डुमरांव में गूंजा शहनाई का स्वर, बिस्मिल्ला खां महोत्सव में झूमे दर्शक

डुमरांव (बक्सर)। कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार एवं जिला प्रशासन बक्सर के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को राज +2 उच्च विद्यालय, डुमरांव के ऐतिहासिक मैदान में उस्ताद बिस्मिल्ला खां महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डुमरांव विधायक राहुल कुमार सिंह, जिला पदाधिकारी साहिला, उप विकास आयुक्त निहारिका छवि, अपर समाहर्ता अरुण कुमार सिंह एवं अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।

इस अवसर पर जिला पदाधिकारी ने कहा कि उस्ताद बिस्मिल्ला खां का जन्म डुमरांव की पावन धरती पर हुआ था। उन्होंने शहनाई वादन को वैश्विक पहचान दिलाई और अपना पूरा जीवन संगीत को समर्पित किया। बनारस घराने की शैली में उन्होंने शहनाई को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण सहित वर्ष 2001 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

महोत्सव में स्थानीय कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सुमन कुमारी, अमित कुमार, अभिषेक कुमार, ऐश्वर्या कुमारी, शिवपूर्णा पाण्डेय, ओमकार दूबे, ज्योति कुमारी एवं ब्रजेश चौबे ने अपने गायन से समां बांधा, वहीं मनोज मोहित ने नृत्य प्रस्तुति से खूब तालियां बटोरीं। शुभम कुमार के समूह गायन ने भी दर्शकों का दिल जीत लिया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण सूफी बॉलीवुड गायक राकेश राज शानू की प्रस्तुति रही। उनके गीतों ने पूरे माहौल को सुरमय बना दिया और दर्शक झूम उठे। इसके बाद जयपुर घराने के शबरी ब्रदर्स ने अपनी प्रस्तुति से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।

सबसे खास प्रस्तुति नारिश हुसैन खान सहित उस्ताद बिस्मिल्ला खां घराने के कलाकारों द्वारा दी गई। शहनाई और तबला वादन ने ऐसा वातावरण बनाया कि दर्शकों को लगा मानो स्वयं उस्ताद बिस्मिल्ला खां मंच पर सजीव हो उठे हों। पूरा कार्यक्रम संगीत की मधुर धुनों से सराबोर रहा।

इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार मुरली श्रीवास्तव ने मंच से उस्ताद बिस्मिल्ला खां के जीवन और उनके योगदान पर प्रकाश डालते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि वे न केवल एक महान कलाकार थे, बल्कि भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर भी थे।
महोत्सव ने डुमरांव की सांस्कृतिक पहचान को एक बार फिर जीवंत कर दिया और संगीत प्रेमियों के लिए यह आयोजन यादगार बन गया।

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