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यूजीसी नए बिल के विरोध में बक्सर में युवाओं का प्रदर्शन, डीएम के माध्यम से राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन

 

मार्च वीर कुंवर सिंह चौक पहुंचते ही एक सभा में तब्दील हो गया। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के कारण कुछ देर के लिए यातायात बाधित हो गया, जिसे देखते हुए सभा को संक्षिप्त रखा गया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल समाहरणालय पहुंचा और भारत के राष्ट्रपति के नाम से जिला पदाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे दिवाकर पाठक एवं सुशील कुमार राय ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 विधि के समक्ष समानता की गारंटी देता है, लेकिन यूजीसी के नए नियमों में भेदभाव की परिभाषा को एकतरफा रखा गया है, जिससे केवल कुछ वर्गों को ही संरक्षण मिलता है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा और न्याय का अधिकार सभी जातियों एवं वर्गों के छात्रों के लिए समान होना चाहिए।

नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि नए नियमों में झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर दंडात्मक प्रावधान हटा दिए गए हैं, जिससे शिक्षण संस्थानों में निर्दोष छात्रों और शिक्षकों के उत्पीड़न की आशंका बढ़ गई है। उन्होंने मांग की कि शिकायतकर्ता की गलत जानकारी पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान पुनः जोड़ा जाए।

प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी नियमों में पीड़ित की परिभाषा को समावेशी बनाने, आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को समान सुरक्षा देने और आरक्षण व विशेष प्रावधानों का लाभ केवल पात्र छात्रों तक सीमित रखने की मांग की।

इस मौके पर सुशील कुमार राय, दिवाकर पाठक, नवीन निश्चल चतुर्वेदी, जितेंद्र ठाकुर, सतीश चंद्र त्रिपाठी, विनोद राय, आशानंद सिंह, मनोज सिंह सहित हजारों की संख्या में सामान्य वर्ग एवं यूजीसी अधिनियम से शोषित समाज के लोग मौजूद रहे।

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