
बक्सर। महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय, बक्सर में बीसीए एवं बीबीए के नवप्रवेशी विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में विद्यार्थियों को महाविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण, पाठ्यक्रम, रोजगार की संभावनाओं और करियर निर्माण के विभिन्न अवसरों की जानकारी दी गयी.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य सह बीसीए एवं बीबीए के निदेशक प्रो. कृष्ण कांत सिंह ने विद्यार्थियों को लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को तय करना होगा कि वे केवल तकनीकी विशेषज्ञ बनना चाहते हैं या अपनी नेतृत्व क्षमता और व्यापक दृष्टिकोण के साथ बेहतर पेशेवर के रूप में स्वयं को विकसित करना चाहते हैं. उन्होंने समय के सदुपयोग, नियमित कक्षा उपस्थिति, अनुशासन और निरंतर प्रयास को सफलता की कुंजी बताया.
उन्होंने विद्यार्थियों को भविष्य के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने का संदेश देते हुए कहा कि केवल लक्ष्य तय करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे हासिल करने के लिए नियमित मेहनत और अनुशासन जरूरी है.

बीसीए के समन्वयक डॉ. सैकत देबनाथ एवं बीबीए के समन्वयक डॉ. पंकज चौधरी ने विद्यार्थियों व अभिभावकों का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि बीसीए और बीबीए जैसे रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को डिग्री के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान, कौशल, रोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करते हैं.
कार्यक्रम में बीसीए विभाग के शिक्षक अरुण कुमार ओझा, मधुसूदन कुमार एवं यथार्थ राज ने विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम एवं विषयों की जानकारी दी. वहीं बीबीए विभाग के शिक्षक अरविंद कुमार मिश्रा एवं सरोज कुमार सर्राफ ने प्रबंधन शिक्षा, पाठ्यक्रम की संरचना और विभिन्न विषयों की उपयोगिता से विद्यार्थियों को अवगत कराया.
अभिभावकों ने भी रखे विचार
कार्यक्रम में अभिभावकों की सहभागिता विशेष आकर्षण का केंद्र रही. एक नवप्रवेशी छात्रा के अभिभावक, जो स्वयं महाविद्यालय के पूर्व छात्र रह चुके हैं, ने विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति और अनुशासन में अभिभावकों की भूमिका पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा और भविष्य निर्माण में माता-पिता की जिम्मेदारी केवल महाविद्यालय में दाखिला कराने तक सीमित नहीं है. बच्चों की नियमित कक्षा उपस्थिति, पढ़ाई, अनुशासन और शैक्षणिक प्रगति पर भी अभिभावकों को ध्यान देना चाहिए.
उन्होंने कहा कि बेटियों के साथ-साथ बेटों के समय और गतिविधियों पर भी अभिभावकों को ध्यान देना चाहिए. उनके विचारों से उपस्थित अभिभावक प्रभावित हुए और उन्होंने अपने बच्चों की नियमित उपस्थिति, पढ़ाई एवं समग्र विकास पर ध्यान देने का भरोसा दिलाया.
कार्यक्रम के आयोजन एवं समन्वय में बीसीए एवं बीबीए सहायक डॉ. शिवम भारद्वाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही. उन्होंने कार्यक्रम की व्यवस्था, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के समन्वय तथा संचालन में योगदान दिया.
कार्यक्रम के माध्यम से नवप्रवेशी विद्यार्थियों को महाविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था से परिचित कराने के साथ उन्हें करियर, अनुशासन और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक किया गया. विद्यार्थियों एवं अभिभावकों ने कार्यक्रम को उपयोगी एवं मार्गदर्शक बताया.




