
बक्सर. अरवल सदर अस्पताल में सिविल सर्जन के साथ हुई हिंसात्मक घटना और अमर्यादित व्यवहार के विरोध में बुधवार, 22 जुलाई 2026 को बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के आह्वान पर बक्सर जिले में सदर अस्पताल सहित सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार कर दिया गया. इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ा और सैकड़ों लोग बिना इलाज लौटने को मजबूर हुए.
संघ के निर्णय के अनुसार राज्यभर के सभी सेवा चिकित्सकों ने 22 जुलाई को ओपीडी में मरीज नहीं देखे. हालांकि मरीजों के हित को देखते हुए इमरजेंसी और जीवनरक्षक सेवाओं को पूर्ववत जारी रखा गया. सदर अस्पताल बक्सर में भी सुबह से रजिस्ट्रेशन काउंटर बंद रहे. डॉक्टर ओपीडी कक्षों में नहीं बैठे, जिसके कारण सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए आए मरीज घंटों इंतजार के बाद वापस लौट गए.
बहिष्कार का मुख्य कारण अरवल सदर अस्पताल में 21 जुलाई 2026 तक सिविल सर्जन के साथ हुई मारपीट के आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होना है. बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ का कहना है कि इस घटना से पूरे राज्य के सरकारी चिकित्सकों में गहरी असुरक्षा और रोष है. संघ ने पहले भी सरकार से दोषियों पर अविलंब कठोर कार्रवाई और अस्पतालों में चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की थी, लेकिन अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए. इसी कारण संघ को बाध्य होकर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा.

अस्पताल प्रशासन के अनुसार इमरजेंसी में आने वाले गंभीर मरीजों, दुर्घटना और प्रसव संबंधी मामलों का इलाज सामान्य रूप से किया जा रहा है. डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि जब तक जान-माल का खतरा वाला मामला है, तब तक आपातकालीन सेवाएं बाधित नहीं होंगी.
इस बहिष्कार से सबसे अधिक परेशानी दूरदराज के गांवों से आए मरीजों को हुई. कई मरीज सुबह से ही सदर अस्पताल पहुंच गए थे, लेकिन ओपीडी बंद होने की जानकारी मिलने पर उन्हें बिना पर्चा कटाए ही घर लौटना पड़ा. कुछ मरीजों ने निजी क्लिनिक का रुख किया.
बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ ने सरकार से मांग की है कि अरवल घटना के दोषियों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए और सभी सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जाए. संघ का कहना है कि जब तक चिकित्सकों की सुरक्षा की लिखित गारंटी नहीं मिलती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.




