
बक्सर. शिक्षक दिवस के अवसर पर फाउंडेशन स्कूल एवं जी.डी. मिश्रा इंस्टीट्यूट ऑफ हायर स्टडीज के शिक्षकों एवं प्रोफेसरों द्वारा रचित पुस्तक ‘आत्मज्योति’ का शनिवार की शाम विद्यालय परिसर में भव्य विमोचन किया गया. इस अवसर पर शिक्षा जगत से जुड़े बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं, प्राचार्य, निदेशक एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे.
कार्यक्रम में आंगनबाड़ी सेविकाओं, प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाओं, हाई स्कूल एवं इंटर विद्यालयों के शिक्षकों तथा महाविद्यालयों के प्रोफेसरों की गरिमामयी उपस्थिति रही. बक्सर के विभिन्न विद्यालयों के प्राचार्य एवं निदेशक भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे. कार्यक्रम की मुख्य अतिथि बक्सर की उप विकास आयुक्त थीं. फाउंडेशन स्कूल के निदेशक प्रदीप कुमार मिश्रा एवं मान्या मिश्रा भी उपस्थित रहे. अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया.
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ. विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत कुचिपुड़ी नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और सभागार तालियों से गूंज उठा. नन्हे विद्यार्थियों ने आत्मविश्वास एवं अनुशासन के साथ अतिथियों का स्वागत किया, जिसकी सभी ने सराहना की.

शिक्षकों को खुद बनना होगा बच्चों के लिए उदाहरण
विद्यालय के प्राचार्य मनोज कुमार त्रिगुण ने पुस्तक के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि हम चाहते हैं कि बच्चे पढ़ें, लिखें, समझें और नवाचार करें, तो सबसे पहले शिक्षकों को स्वयं इन कार्यों को अपनाकर उनके सामने उदाहरण प्रस्तुत करना होगा. इसी सोच के साथ ‘आत्मज्योति’ का प्रकाशन एक सार्थक प्रयास है. उन्होंने बताया कि पुस्तक में शिक्षकों ने अपने अनुभवों, विचारों एवं रचनात्मक दृष्टिकोण को शब्दों में अभिव्यक्त किया है. लगभग एक समान सामाजिक एवं शैक्षिक परिवेश में कार्य करने के बावजूद विभिन्न शिक्षकों ने अपनी संवेदनाओं, विचारों और अनुभवों को अलग-अलग रूपों में प्रस्तुत किया है.
प्राचार्य ने आंगनबाड़ी सेविकाओं एवं शिक्षिकाओं की भूमिका की भी सराहना की. उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला मजबूत करने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है. उन्होंने बताया कि पुस्तक विद्यालय के मेंटर डॉ. राजेश्वर मिश्रा के मार्गदर्शन एवं विद्यालय में निरंतर नवाचार को बढ़ावा देने की उनकी सोच को मूर्त रूप देने की दिशा में एक प्रयास है.
गुरु के योगदान को किया याद
मुख्य अतिथि उप विकास आयुक्त ने विद्यालय की वार्षिक पुस्तिका का विमोचन किया. अपने संबोधन में उन्होंने गुरु के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने अपने जीवन की प्रिय शिक्षिका के रूप में अपनी माता का उल्लेख करते हुए विद्यालयी जीवन में मिले गुरुजनों के योगदान को भी स्मरण किया. उन्होंने उपस्थित सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दीं तथा शिक्षा एवं समाज निर्माण में उनके समर्पण और योगदान की सराहना की.
शिक्षक की रचनात्मकता से विद्यार्थियों को मिलती है प्रेरणा
फाउंडेशन स्कूल के निदेशक प्रदीप कुमार मिश्रा ने शिक्षकों द्वारा अपने विषय एवं नियमित दायित्वों से आगे बढ़कर लेखन एवं पठन जैसे रचनात्मक कार्यों को अपनाने की सराहना की. उन्होंने कहा कि एक शिक्षक की सीखने और सृजन करने की प्रवृत्ति ही विद्यार्थियों में नई सोच एवं रचनात्मकता का विकास करती है.
मान्या मिश्रा ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी के लिए सकारात्मक सोच, रचनात्मकता, दूरदर्शिता एवं नेतृत्व क्षमता अत्यंत आवश्यक है. इन गुणों का विकास विद्यालयी जीवन से ही किया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थी भविष्य में जिम्मेदार एवं सक्षम नागरिक बन सकें.
कार्यक्रम के दौरान जी.डी. मिश्रा इंस्टीट्यूट ऑफ हायर स्टडीज के प्राचार्य ने पुस्तक के संपादकीय दल के सदस्यों को उनके कठिन परिश्रम, टीम भावना एवं समर्पण के लिए धन्यवाद दिया तथा उन्हें सम्मानित किया.
अंत में डॉ. एस.के. दुबे ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, शिक्षिकाओं एवं आयोजन से जुड़े सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया. उन्होंने कार्यक्रम की सफलता का श्रेय विद्यालय एवं महाविद्यालय के सभी सदस्यों के अथक परिश्रम, सामूहिक प्रयास एवं समर्पण को दिया. उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग एवं टीम भावना के कारण ही इस गरिमामयी आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न किया जा सका.
शिक्षक दिवस पर आयोजित यह समारोह शिक्षकों की लेखनी, सृजनशीलता, अनुभव और शिक्षा के प्रति समर्पण को सम्मान देने वाला यादगार आयोजन बना.




