
बक्सर. शहर के नया बाजार स्थित डॉ. केके मंडल महिला महाविद्यालय में सोमवार को हिंदी दिवस के अवसर पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य अनिल कुमार ने की, जबकि संचालन प्रो. रामाधार सिंह ने किया. इस दौरान वक्ताओं ने हिंदी भाषा के महत्व, इतिहास, समृद्धि और प्रचार-प्रसार को लेकर अपने विचार रखे.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. रामाधार सिंह ने कहा कि हिंदी भारत में सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषाओं में शामिल है. हिंदी देवनागरी लिपि में लिखी जाती है, जो बाएं से दाएं लिखी जाती है. उन्होंने बताया कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था. इसके बाद प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है.
प्रभारी प्राचार्य अनिल कुमार ने कहा कि हिंदी विश्व स्तर पर सबसे अधिक बोली जाने वाली प्रमुख भाषाओं में शामिल है. यह केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, एकता और प्राचीन परंपराओं की पहचान भी है. उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी के प्रति सम्मान की भावना रखते हुए इसके प्रयोग को बढ़ावा देने का आह्वान किया.
प्रो. इंद्रमणि लाल ने कहा कि हिंदी का शब्द भंडार अत्यंत समृद्ध है और इसका उच्चारण वैज्ञानिक प्रकृति का है. हिंदी देश के विभिन्न राज्यों और संस्कृतियों के लोगों को आपस में जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करती है. उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी सहित अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने देश को एकजुट करने के लिए हिंदी को माध्यम बनाया था. आज आवश्यकता है कि हम अपनी मातृभाषा का सम्मान करें और इसके प्रचार-प्रसार में सक्रिय योगदान दें.
संगोष्ठी के दौरान प्रो. धीरेन्द्र सिंह, प्रो. सुरेंद्र सिंह, प्रो. भुवनेश्वर सिंह, प्रो. सुरेंद्र सिंह यादव एवं डॉ. परमहंस सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए. कार्यक्रम में हिंदी भाषा के महत्व और वर्तमान समय में इसकी उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की गई.



