मुख्यमंत्री का स्वागत, लेकिन श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोपरि हो : पंकज सनातन
वामन द्वादशी एवं त्रिमोहानी मेला को लेकर समय निर्धारण और व्यवस्थाओं पर पुनर्विचार की मांग

बक्सर. वामन द्वादशी एवं त्रिमोहानी मेला के अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बक्सर आगमन को लेकर युवा सामाजिक कार्यकर्ता पंकज सनातन ने श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग की है. उन्होंने कहा कि 23 सितंबर को आयोजित होने वाला यह मेला बक्सर की प्राचीन धार्मिक परंपरा और विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है.
पंकज सनातन ने कहा कि मुख्यमंत्री का भगवान वामन के दर्शन-पूजन के लिए बक्सर आगमन बक्सरवासियों के लिए गौरव की बात है. मुख्यमंत्री का स्वागत करना बक्सर की परंपरा और आतिथ्य का हिस्सा है. हालांकि, मुख्यमंत्री के आगमन के दौरान सुरक्षा, यातायात और प्रोटोकॉल की व्यवस्थाओं के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी, धार्मिक यात्राओं, रथयात्रा एवं शोभायात्राओं को ध्यान में रखना आवश्यक है.
उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री का कार्यक्रम और धार्मिक आयोजन एक ही समय एवं क्षेत्र में केंद्रित होते हैं, तो प्रशासन के समक्ष समन्वय की चुनौती उत्पन्न हो सकती है. ऐसी स्थिति में सामान्य श्रद्धालुओं की धार्मिक यात्रा, दर्शन और आवागमन अनावश्यक रूप से बाधित नहीं होना चाहिए. सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा दोनों को समान प्राथमिकता मिलनी चाहिए.
समय निर्धारण पर पुनर्विचार की मांग
पंकज सनातन ने कहा कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के कारण श्रद्धालुओं की आवाजाही अथवा निर्धारित धार्मिक यात्राओं पर अत्यधिक नियंत्रण की आवश्यकता उत्पन्न होती है, तो इससे जनभावना प्रभावित हो सकती है. वहीं सुरक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की कमी रहना भी उचित नहीं होगा. इसलिए पूर्व नियोजन, बेहतर समन्वय और समय निर्धारण पर गंभीरता से पुनर्विचार किया जाना चाहिए.
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे मुख्यमंत्री के आगमन के विरोध में नहीं हैं. उन्होंने कहा कि भगवान वामन के दर्शन के लिए मुख्यमंत्री का बक्सर आना सम्मान की बात है. उनकी अपेक्षा है कि मुख्यमंत्री की गरिमा, सुरक्षा प्रोटोकॉल, श्रद्धालुओं की आस्था और बक्सर की धार्मिक परंपरा के बीच संतुलन स्थापित हो, ताकि किसी भी पक्ष को असुविधा न हो.
उन्होंने कहा कि कार्यक्रम की सफलता केवल उसके उद्देश्य से नहीं, बल्कि उसके समय, परिस्थितियों और व्यापक जनहित पर पड़ने वाले प्रभाव से भी निर्धारित होती है. प्रशासन एवं संबंधित सभी पक्षों को राजनीतिक निहितार्थ से ऊपर उठकर जनभावना और धार्मिक परंपरा को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए.
पंकज सनातन ने कहा कि मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत हो, भगवान वामन की आराधना और परंपरा की गरिमा बनी रहे, धार्मिक यात्राएं निर्बाध रहें तथा सामान्य श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो, यही इस अवसर पर सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए.



