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बक्सर में छठ मइया की महिमा का आलोक — खरना के साथ व्रतियों ने शुरू किया 36 घंटे का निर्जला उपवास

बक्सर। लोक आस्था के चार दिवसीय महापर्व छठ का दूसरा दिन रविवार को पूरे जिले में आस्था और श्रद्धा के रंग में डूबा रहा। व्रतियों ने दिनभर निर्जल रहकर गंगा में पावन स्नान किया, भगवान सूर्य और छठ मइया की पूजा-अर्चना कर सायंकाल खरना का प्रसाद ग्रहण किया। इसके साथ ही उन्होंने अगले 36 घंटे के कठिन निर्जला व्रत की शुरुआत की।

महापर्व की शुरुआत शनिवार को ‘नहाय-खाय’ के साथ हुई थी। व्रतियों ने मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी के ईंधन से गुड़, दूध और चावल की खीर व रोटी बनाकर सूर्यदेव को अर्पित की। प्रसाद ग्रहण करने के बाद घर-परिवार और सगे-संबंधियों को भी खिलाया गया। रात में चंद्रदर्शन कर जल ग्रहण के पश्चात व्रतियों ने निराहार उपवास का संकल्प लिया।

🎵 छठ गीतों से गूंजा बक्सर — “कांच ही बांस के बहंगिया…” ने बांधा भक्तिमय माहौल

शहर से लेकर गांव तक छठ मइया के गीतों ने पूरे वातावरण को छठमय बना दिया है। हर गली-मोहल्ले में पारंपरिक गीतों की गूंज से भक्ति और समरसता का अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहा है।


“कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए…”
“सुगवा के मरबो धनुष से, सुगवा गिरे मुरछाए…”
जैसे भक्ति गीतों ने पूरे माहौल को आध्यात्मिक बना दिया है।

☀️ अर्घ्य का मुहूर्त — जानिए कब दें सूर्य को अर्घ्य

पौराणिक आचार्य श्रीकृष्णानंद जी ने बताया कि

संध्याकालीन अर्घ्य — सोमवार, 27 अक्टूबर, शाम 4:30 से 5:30 बजे के बीच देना श्रेष्ठ रहेगा।

प्रात:कालीन अर्घ्य — मंगलवार, 28 अक्टूबर, सूर्योदय 6:25 बजे; अर्घ्य का शुभ समय सुबह 6:00 से 7:00 बजे तक रहेगा।

सोमवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के साथ घाटों पर श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ने की संभावना है। मंगलवार को उदयीमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर व्रतियों द्वारा पारण के साथ महापर्व का समापन होगा।

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