
बक्सर। भोजपुर जिले के चर्चित भरत भूषण तिवारी पुलिस एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। मामले में आरोपी बनाए गए जगदीशपुर के तत्कालीन सब-डिविजनल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) राजेश कुमार शर्मा को पटना में मद्यनिषेध विभाग में डीएसपी के पद पर नई तैनाती दिए जाने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
आम आदमी पार्टी के बक्सर जिलाध्यक्ष रमेश वर्मा ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बिहार सरकार की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर सरकार निष्पक्ष जांच और कानून के राज की बात करती है, वहीं दूसरी ओर गंभीर मामलों में आरोपित अधिकारियों को महत्वपूर्ण और प्रभावशाली पदों पर नियुक्त किया जा रहा है।
रमेश वर्मा ने कहा कि भरत भूषण तिवारी कथित एनकाउंटर मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद संबंधित अधिकारी को फील्ड ड्यूटी से हटाकर पुलिस लाइन भेजा गया था। इसके बावजूद उन्हें पटना जैसे महत्वपूर्ण जिले में मद्यनिषेध विभाग में डीएसपी के पद पर तैनात कर दिया गया, जिससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

उन्होंने कहा कि किसी मामले में प्राथमिकी दर्ज होने और जांच प्रक्रिया जारी रहने के बावजूद आरोपी अधिकारी को ऐसी जिम्मेदारी सौंपना न्याय व्यवस्था और निष्पक्ष जांच प्रक्रिया का मखौल उड़ाने जैसा है। सरकार को चाहिए कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे, ताकि आम जनता का कानून और न्याय व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।
आम आदमी पार्टी ने सरकार से मांग की है कि इस नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाए तथा भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाए।




