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26 वर्षों बाद अदालत का बड़ा फैसला—ब्रह्मपुर 1999 मर्डर केस में तीन को लाइफ टाइम जेल

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बक्सर। ब्रह्मपुर थाना कांड संख्या 49/1999 एवं सेशन ट्रायल 156/2001 से जुड़े 26 वर्ष पुराने बहुचर्चित मामले में मंगलवार को अदालत ने अपना फैसला सुनाया।
जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश पंचम श्री संजीत कुमार सिंह की अदालत ने ब्रह्मपुर के रहने वाले संजय तिवारी, उमाशंकर तिवारी और ध्रुव तिवारी को धारा 302/149 के तहत आजीवन कारावास तथा 10,000 रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई।

साथ ही धारा 307/149 में सभी दोषियों को 7 वर्ष का कारावास और 10–10 हजार रुपए अर्थदंड लगाया गया।

निर्णय के दिन चौथा अभियुक्त भीम तिवारी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, जिसके बाद उसे फरार घोषित करते हुए वारंट जारी कर दिया गया।

🔹 मामला क्या था?

अपर लोक अभियोजक शेषनाथ सिंह के अनुसार, घटना 8 मई 1999 की है।
शाम करीब 3:30 बजे अभियुक्तगण सूचक की जमीन पर चहारदीवारी बना रहे थे, जिसका विरोध करने पर विवाद बढ़ गया।

अभियुक्तों ने लाठी-डंडे से ताबड़तोड़ हमला किया, जिसमें कई लोग घायल हो गए।
हमले में ब्रह्मपुर निवासी रामाशंकर प्रसाद (पिता—विश्वनाथ प्रसाद) के सिर पर गंभीर चोट आई।
उन्हें बेहतर इलाज के लिए PMCH, पटना भेजा गया, जहां उनकी मौत हो गई।

घटना की प्राथमिकी दयाशंकर प्रसाद द्वारा दर्ज कराई गई थी।

🔹 न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्य

कुल 9 गवाहों की गवाही पेश की गई।

प्राथमिकी में कुल 8 अभियुक्त नामजद थे।

मामले में दो अभियुक्तों की फाइल जीजेवी न्यायालय में स्थानांतरित हुई।

सुनवाई के दौरान 2 अभियुक्तों की मृत्यु हो गई।

बचे चार अभियुक्तों में से तीन को सजा सुनाई गई, चौथा (भीम तिवारी) फरार बताया गया।

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