

बक्सर। नशा मुक्ति जागरूकता, रोकथाम एवं पुनर्वास विषय पर एकदिवसीय सेमिनार का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकार एवं बक्सर मेडिकल सिटी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नशे की लत से जूझ रहे लोगों के प्रति समाज में संवेदनशीलता और जागरूकता बढ़ाना था।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार काजल झांब सहित अन्य न्यायाधीशों ने दीप जलाकर सेमिनार का विधिवत उद्घाटन किया।
नशा अपराध नहीं, एक बीमारी है
वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि नशा से ग्रसित व्यक्ति को अपराधी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि वह एक बीमारी से पीड़ित होता है, जिसे उपचार और परामर्श की आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा कि नशे का दुष्प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका परिवार और समाज भी प्रभावित होता है। कई बार समाज ऐसे लोगों के साथ कठोर व्यवहार करता है, जिससे उनकी स्थिति और बिगड़ जाती है। वक्ताओं ने सहानुभूति और मनोचिकित्सकीय परामर्श को नशा मुक्ति का प्रभावी माध्यम बताया।
विधिक सेवा प्राधिकार से ले सकते हैं सहयोग
न्यायाधीश सह सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकार नेहा दयाल ने कहा कि नशे से ग्रसित व्यक्ति या उनके परिजन जिला विधिक सेवा प्राधिकार से संपर्क कर कानूनी व परामर्श संबंधी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
दूसरे सत्र में चिकित्सकों ने नशे के दुष्प्रभाव, उपचार और पुनर्वास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं तथा उपस्थित लोगों को जागरूक किया।
कई गणमान्य लोग रहे उपस्थित
कार्यक्रम का मंच संचालन सिविल जज नेहा त्रिपाठी तथा दूसरे सत्र का संचालन वैष्णवी मिश्रा ने किया। आयोजन में संघ के महासचिव बिंदेश्वरी प्रसाद पांडे, दीपेश श्रीवास्तव, सुधीर कुमार, अजय कुमार, कृष्णा जायसवाल, इंद्रजीत चौबे, मुकेश खरवार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
सेमिनार के माध्यम से समाज को यह संदेश दिया गया कि नशा मुक्ति केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक और मानवीय पहल भी है।



