
बक्सर। महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय के मानस सभागार में मंगलवार को “भारतीय ज्ञान परंपरा में मानवता: एक अनंत यात्रा” विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलन एवं महर्षि विश्वामित्र की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ गरिमामय वातावरण में किया गया।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) कृष्ण कांत सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल सिद्धांतों का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन को मानवीय दृष्टिकोण से जीने की एक उत्कृष्ट पद्धति है। उन्होंने भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) को आधुनिक विज्ञान के लिए मानवीय आधार प्रदान करने वाली जीवंत धारा बताया।
मुख्य वक्ता प्रो. रमेश चंद्र नेगी (सारनाथ, वाराणसी) ने भारतीय एवं बौद्ध दर्शन के समन्वय पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि करुणा और प्रज्ञा भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल तत्व हैं, जो व्यक्ति को वैश्विक नागरिक बनाने की क्षमता रखते हैं।

वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. श्री प्रकाश राय ने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ को भारतीय ज्ञान परंपरा का सर्वोच्च मानवीय मूल्य बताया। उन्होंने कहा कि साहित्य और दर्शन का मूल उद्देश्य मानवता की रक्षा और संवेदनशील समाज का निर्माण करना है।
शिक्षा संकायाध्यक्ष प्रो. रविकांत ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के संदर्भ में भारतीय प्राचीन शिक्षण पद्धतियों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा केवल सूचना प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण की प्रक्रिया होनी चाहिए। वहीं अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. वाचस्पति द्विवेदी ने ‘स्पिरिचुअल ह्यूमैनिटीज’ विषय पर अपने विचार रखते हुए बताया कि भारतीय दर्शन ने वैश्विक साहित्य और चिंतन को गहराई से प्रभावित किया है।
तकनीकी सत्र में शोधपत्रों की प्रस्तुति
भोजनावकाश के बाद आयोजित द्वितीय सत्र में जे.पी. विश्वविद्यालय, छपरा के प्रो. उदय शंकर ओझा ने लोक ज्ञान एवं मौखिक परंपराओं को मानवता की वास्तविक धरोहर बताते हुए इन्हें अकादमिक विमर्श का हिस्सा बनाने पर बल दिया। इस दौरान विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए लगभग 40 शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन सह-संयोजक डॉ. प्रीति मौर्या ने किया, जबकि डॉ. ओम प्रकाश आर्य ने मुख्य वक्ताओं का परिचय प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की रूपरेखा एवं प्रस्तावना संयोजक एवं अंग्रेजी विभागाध्यक्ष श्री प्रियेश रंजन ने रखी।
प्रथम दिवस की कार्यवाही का समापन आयोजन सचिव एवं संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. रवि प्रभात के औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
इस अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रो. संजय कुमार त्रिपाठी, प्रो. सुभाष चंद्र पाठक, डॉ. श्याम जी मिश्रा, डॉ. मोहन लाल श्रीवास्तव, डॉ. प्रदीप कुमार तिवारी, डॉ. कृष्णा अली अल्बर्ट, डॉ. विजय राज कुमावत, डॉ. आनंद भूषण पांडेय, डॉ. सतेंद्र कुमार पांडेय, डॉ. अंकिता मिश्रा, डॉ. वंदना कुमारी, डॉ. स्मृति चौधरी एवं डॉ. टी.एन. पांडेय सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मी, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
संगोष्ठी के दूसरे दिन 13 मई 2026 को विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शैलेन्द्र कुमार चतुर्वेदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस अवसर पर महाविद्यालय के संकलित ग्रंथों का विमोचन भी किया जाएगा। साथ ही नाइजीरिया के तोलाराम ग्रुप के प्रतिनिधि विशिष्ट अतिथि के रूप में ऑनलाइन जुड़ेंगे। कार्यक्रम का समापन तकनीकी सत्र एवं प्रमाण पत्र वितरण के साथ होगा।




