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बक्सर के लाल डॉ. सिद्धार्थ भारद्वाज को पटना विश्वविद्यालय में महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व

 

बक्सर। बक्सर एवं शाहाबाद क्षेत्र के लिए गर्व और खुशी की बात है कि प्रख्यात शिक्षाविद् एवं अर्थशास्त्री डॉ. सिद्धार्थ भारद्वाज को पटना विश्वविद्यालय में सहायक वित्त पदाधिकारी (Assistant Finance Officer) का अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व सौंपा गया है। पटना विश्वविद्यालय के कुलपति के आदेशानुसार उन्हें यह जिम्मेदारी उनके वर्तमान दायित्वों के साथ तत्काल प्रभाव से प्रदान की गई है। उनकी इस उपलब्धि पर शिक्षा जगत, सामाजिक संगठनों एवं शुभचिंतकों में हर्ष का माहौल है।

डॉ. सिद्धार्थ भारद्वाज बक्सर जिले के डुमरांव प्रखंड अंतर्गत लाखन डिहरा गांव के प्रतिष्ठित शैक्षणिक परिवार से आते हैं। उनका परिवार लंबे समय से शिक्षा, विद्वता और सामाजिक चेतना के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। परिवार के कई सदस्य शिक्षक एवं प्राध्यापक के रूप में समाज को दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।

वे अपने दिवंगत पिता डॉ. रविकांत दुबे की समृद्ध शैक्षणिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। डॉ. रविकांत दुबे महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय, बक्सर के स्नातकोत्तर विभाग में विभागाध्यक्ष एवं एसोसिएट प्रोफेसर रहे थे। शिक्षा तथा भोजपुरी भाषा-साहित्य के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए बिहार सरकार ने उन्हें भोजपुरी अकादमी के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी सौंपी थी।

डॉ. सिद्धार्थ भारद्वाज ने अपने छात्र जीवन से ही असाधारण प्रतिभा का परिचय दिया। वर्ष 2011 में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), नई दिल्ली की प्रतिष्ठित जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) परीक्षा में उन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर बिहार का नाम रोशन किया था। इस उपलब्धि के लिए उन्हें “बिहार गौरव सम्मान” से सम्मानित किया गया तथा एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई थी। इसके अलावा बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की सहायक प्राध्यापक चयन प्रक्रिया में उन्होंने द्वितीय स्थान प्राप्त किया था।

डॉ. सिद्धार्थ की इस उपलब्धि की जानकारी उनके अनुज शिवम भारद्वाज, जो वर्तमान में महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय, बक्सर में कार्यरत हैं, ने मीडिया को दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि पूरे परिवार और क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है।

इस अवसर पर परिवार के वरिष्ठ सदस्य एवं डॉ. सिद्धार्थ भारद्वाज के पितामह के अनुज प्रो. नन्द जी दुबे, सेवानिवृत्त हिन्दी व्याख्याता, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा, ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि परिवार की गौरवशाली शैक्षणिक परंपरा सुरक्षित हाथों में है और डॉ. सिद्धार्थ अपनी प्रतिभा, परिश्रम एवं समर्पण से इस विरासत को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं।

डॉ. सिद्धार्थ भारद्वाज को मिली इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी पर परिवार के सदस्यों, मित्रों, सहकर्मियों, शिक्षाविदों एवं शुभचिंतकों ने उन्हें हार्दिक बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।

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