
बक्सर : अर्णव चक्रवात के कारण तेज हवा और मूसलाधार बारिश से जिले के कई इलाकों में धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। खेतों में तैयार धान की बालियां जमीन पर बिछ गयी हैं। कई किसानों के खेतों में जलजमाव की स्थिति बनी हुई है। फसल के नुकसान से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
किसानों का कहना है कि उन्होंने महीनों की मेहनत और पूंजी लगाकर धान की फसल तैयार की थी। कई परिवारों को इस फसल से बेटी की शादी, बच्चों की पढ़ाई और बैंक या साहूकार का कर्ज चुकाने की उम्मीद थी। ऐसे में चक्रवात के कारण फसल बर्बाद होने से उनकी आर्थिक योजनाएं प्रभावित हुई हैं।
फसल नहीं, किसानों का सहारा उजड़ा

जनसुराज पार्टी के जिलाध्यक्ष बजरंगी मिश्रा ने कहा कि किसान के लिए खेत में खड़ी फसल केवल अनाज नहीं, बल्कि पूरे परिवार की सालभर की आजीविका का आधार होती है। खेती में बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल और सिंचाई पर किसान बड़ी रकम खर्च करता है। कई किसान कर्ज लेकर खेती करते हैं और फसल तैयार होने पर कर्ज चुकाने तथा परिवार की जरूरतें पूरी करने की उम्मीद रखते हैं।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा ने किसानों की मेहनत के साथ उनकी आर्थिक सुरक्षा को भी बड़ा झटका दिया है। जिन किसानों की फसल पूरी तरह बर्बाद हुई है, उनके सामने अगली खेती के लिए पूंजी जुटाने की चुनौती भी खड़ी हो गयी है।
खेतों तक पहुंचकर कराया जाये नुकसान का आकलन
बजरंगी मिश्रा ने राज्य सरकार से प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल प्रशासनिक टीम भेजकर फसल क्षति का निष्पक्ष सर्वे कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को गांव-गांव और खेतों तक पहुंचकर वास्तविक नुकसान का आकलन करना चाहिए। छोटे और सीमांत किसानों को सर्वे में विशेष प्राथमिकता दी जाये, ताकि कोई भी प्रभावित किसान सरकारी सहायता से वंचित न रहे।
उन्होंने सर्वे की प्रक्रिया पारदर्शी रखने और नुकसान के अनुरूप मुआवजा तय करने की मांग की है।
जलजमाव वाले खेतों से पानी निकालने की मांग
मिश्रा ने कहा कि केवल फसल क्षति का सर्वे कराना पर्याप्त नहीं है। प्रभावित किसानों को समय पर मुआवजा, फसल बीमा और कृषि सहायता का लाभ मिलना चाहिए। जिन खेतों में जलजमाव है, वहां तत्काल पानी निकासी की व्यवस्था की जाये, ताकि बची हुई फसल को और नुकसान से बचाया जा सके।
उन्होंने बड़े पैमाने पर फसल नुकसान वाले क्षेत्रों के लिए विशेष राहत पैकेज देने की भी मांग की, ताकि किसान अगली फसल की तैयारी कर सकें।
‘किसानों को आश्वासन नहीं, तत्काल आर्थिक मदद चाहिए’
जनसुराज जिलाध्यक्ष ने कहा कि किसान की परेशानी को केवल फसल नुकसान के आंकड़ों से नहीं समझा जा सकता। इसके पीछे पूरे परिवार की रोजी-रोटी, बच्चों की पढ़ाई, शादी-ब्याह और कर्ज की जिम्मेदारी जुड़ी होती है। तैयार फसल के बर्बाद होने से किसानों के सामने आगे की आर्थिक जरूरतें पूरी करने का संकट खड़ा हो गया है।
उन्होंने राज्य सरकार से अर्णव चक्रवात से प्रभावित किसानों के लिए राहत प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की। कहा कि किसानों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समय पर मुआवजा और आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए, ताकि वे दोबारा खेती के लिए खड़े हो सकें।



