सात सूत्री मांगों को लेकर आशा कार्यकर्ताओं का जोरदार प्रदर्शन, डीएम कार्यालय पहुंच सौंपा ज्ञापन

बक्सर बिहार राज्य आशा एवं आशा फैसिलिटेटर संघ के राज्य सामान्य परिषद के निर्णय के आलोक में मंगलवार को जिले की तमाम आशा एवं आशा फैसिलिटेटरों ने अपनी सात सूत्री मांगों के समर्थन में नगर भवन से बृहद प्रदर्शन किया. गगनभेदी नारों के साथ प्रदर्शन करते हुए सभी जिला पदाधिकारी कार्यालय पहुंचे और अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के नाम संबोधित था.
प्रदर्शन का नेतृत्व जिला संयोजक अरुण कुमार ओझा, महावीर पंडित, हरे राम सिंह, परमहंस सिंह, मीरा देवी, अभिराजू देवी, मंजू देवी, सरस्वती देवी, कंचन देवी और लीला देवी समेत अन्य ने किया. इस दौरान आयोजित सभा को संबोधित करते हुए आशा कार्यकर्ताओं ने समय पर प्रोत्साहन राशि का भुगतान करने, राज्य राशि का भुगतान सुनिश्चित करने और न्यूनतम मानदेय 26 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग उठायी. इसके अलावा आंगनबाड़ी सेविकाओं की तर्ज पर आशा एवं आशा फैसिलिटेटरों के लिए सेवानिवृत्ति की उम्र 65 वर्ष करने की मांग भी की गयी.
आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि कई प्रखंडों में राशि उपलब्ध रहने के बावजूद समय पर भुगतान नहीं किया जाता है. भुगतान के लिए बार-बार कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ता है और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया जाता है. उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से आशा कार्यकर्ताओं के प्रोत्साहन राशि में बढ़ोतरी से संबंधित घोषणा का हवाला देते हुए बिहार सरकार से केंद्र के निर्णय के अनुरूप प्रस्ताव भेजकर इसका लाभ राज्य की आशा एवं आशा फैसिलिटेटरों को देने की मांग की.

कई माह से लंबित है प्रोत्साहन राशि : जिला संयोजक अरुण कुमार ओझा ने कहा कि आशा एवं आशा फैसिलिटेटर बिहार की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ के रूप में कार्य कर रही हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन, भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर उनके कार्यों की सराहना की जाती रही है. कोरोना काल में भी आशा कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी और उनके कार्य की सराहना राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई. इसके बावजूद उनके कार्य के बदले मिलने वाली अल्प राशि का भुगतान कई माह से लंबित है.
उन्होंने कहा कि सरकार आशा एवं आशा फैसिलिटेटरों की मांगों पर तत्काल विचार कर उनका समाधान करे. मांगें पूरी नहीं होने पर संघ आंदोलन को और तेज करने तथा हड़ताल जैसी कार्रवाई के लिए बाध्य होगा.



