‘विश्वामित्र पथ’ को मिली मंजूरी, सनातन चेतना और क्षेत्रीय विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम

बक्सर। लंबे समय से विश्वामित्र सेना द्वारा चलाए जा रहे जनजागरण और अधिकारों के संघर्ष को बड़ी सफलता मिली है। बिहार सरकार द्वारा बक्सर और आरा के बीच प्रस्तावित 90 किलोमीटर लंबे गंगा पथ परियोजना को मंजूरी दिए जाने के बाद क्षेत्र में खुशी का माहौल है। राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को ‘विश्वामित्र पथ’ नाम दिया गया है, जिसे सनातन संस्कृति और ऋषि परंपरा के सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है।
इस परियोजना के तहत बक्सर से कोईलवर तक बने तटबंध को बक्सर-आरा-मनेर गंगा पथ के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि गंगा तट के धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को भी नई पहचान मिलेगी। साथ ही क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
विश्वामित्र सेना के नेताओं ने इसे संगठन के लंबे संघर्ष और संकल्प की जीत बताया है। संगठन का कहना है कि यह परियोजना बक्सर सहित गंगा किनारे बसे क्षेत्रों के विकास में मील का पत्थर साबित होगी और सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण को नई दिशा देगी।

विश्वामित्र सेना के प्रमुख नेता श्री राजकुमार चौबे ने कहा कि ‘विश्वामित्र पथ’ को मिली मंजूरी केवल सड़क निर्माण की परियोजना नहीं है, बल्कि यह हमारी ऋषि परंपरा, सनातन अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने बिहार सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि संगठन की अन्य प्रमुख मांगें जैसे ‘विश्वामित्र कॉरिडोर’ और बक्सर एयरपोर्ट का निर्माण अभी भी लंबित हैं।
उन्होंने कहा कि इन मांगों की पूर्ति तक विश्वामित्र सेना का संघर्ष निरंतर जारी रहेगा और संगठन जनहित, क्षेत्रीय विकास तथा सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करता रहेगा।
विश्वामित्र सेना के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बिहार सरकार को इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए धन्यवाद और आभार व्यक्त किया। संगठन ने विश्वास जताया कि ‘विश्वामित्र पथ’ परियोजना क्षेत्रीय विकास और सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण के नए अध्याय की शुरुआत साबित होगी।




