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बक्सर में भगत सिंह जयंती पर जोरदार प्रदर्शन, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

बक्सर। शहीदे-आजम भगत सिंह की जयंती के अवसर पर सोमवार को बक्सर के शहीदे-आजम भगत सिंह चौक पर आइसा (AISA), आरवाईए (RYA) और भाकपा माले के कार्यकर्ताओं ने मार्च निकालकर प्रदर्शन किया. इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की गयी. मार्च के दौरान “वोट चोर, गद्दी छोड़”, “इंकलाब जिंदाबाद” और “लोकतंत्र जिंदाबाद” जैसे नारे लगाये गये.

प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शामिल लोगों ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता, मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव आयोग की जवाबदेही को लेकर सवाल उठाये. नेताओं ने कहा कि चुनाव आयोग लोकतंत्र की महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था है. ऐसे में उसकी कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता को लेकर उठने वाले सवालों का स्पष्ट, सार्वजनिक और तथ्यात्मक जवाब सामने आना चाहिए.

SIR और फॉर्म-6 को लेकर उठाये सवाल

मार्च के दौरान नेताओं ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी सवाल उठाये. द इंडियन एक्सप्रेस की सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के विभिन्न फैसलों को लेकर कई बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं. रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने नये मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 में किये गये कुछ बदलावों पर भी आपत्ति जतायी थी.

रिपोर्ट में दर्ज आपत्ति के अनुसार, फॉर्म-6 में SIR से संबंधित सवाल जोड़े जाने को लेकर इसे “illegal” और “unauthorised” बताया गया था. यह संबंधित चुनाव आयुक्तों की दर्ज आपत्ति है, इसे किसी न्यायिक निर्णय का निष्कर्ष नहीं माना जा सकता. वहीं, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के जवाब में कहा है कि पिछले एक वर्ष में लिये गये सभी निर्णय पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णय रहे हैं और अलग-अलग विचार संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं.

नेताओं ने पूछे कई सवाल

आइसा, आरवाईए और भाकपा माले नेताओं ने कहा कि यदि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है, तो उससे जुड़े सवालों का जवाब सार्वजनिक रूप से मिलना चाहिए. उन्होंने मतदाता सूची में बदलाव, SIR के दौरान दस्तावेजों की मांग और चुनाव आयोग की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाये.

नेताओं ने कहा कि भगत सिंह को केवल माल्यार्पण कर याद करना पर्याप्त नहीं है. उनके विचारों की विरासत अन्याय, शोषण और जनविरोधी व्यवस्था के खिलाफ सवाल उठाने तथा जनता के अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करने में है.

उन्होंने कहा कि वोट किसी नेता की जागीर नहीं, बल्कि जनता का संवैधानिक अधिकार है. चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक मतदाता के अधिकारों की रक्षा हो और चुनावी प्रक्रिया को लेकर जनता का भरोसा कायम रहे.

मार्च के अंत में कार्यकर्ताओं ने भगत सिंह के विचारों और उनके संघर्ष के रास्ते पर चलने का संकल्प लिया.

कार्यक्रम में आइसा जिला सचिव अखिलेश ठाकुर, अभिषेक मौर्या, अजीत कुमार, श्रीयांश, उमेश, आदित्य कुमार, अंशु कुशवाहा, आरवाईए जिला संयोजक राजदेव सिंह, दीपू कुमार, सुनील कुमार, कृष्णा यादव, सुनील यादव, रंजीत यादव, बब्लू यादव, भाकपा माले नगर सचिव ओम प्रकाश, प्रमोद सिंह समेत कई कार्यकर्ता मौजूद रहे.

 

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