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राम जी सिंह ने न्यूज विजन को भेजा मानहानि नोटिस, नाम के आगे ‘श्री’ नहीं लगाने पर मांगा ₹1000 हर्जाना

18 नवंबर तक जवाब देने का अल्टीमेटम, आकाश कुमार सिंह उर्फ राम जी सिंह ने मीडिया संस्थान पर सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने का लगाया आरोप

बक्सर। नाम के आगे सम्मानसूचक शब्द ‘श्री’ नहीं लगाने और पूरा नाम प्रकाशित नहीं करने के मामले ने अब कानूनी नोटिस का रूप ले लिया है। बक्सर निवासी आकाश कुमार सिंह उर्फ राम जी सिंह ने मीडिया संस्थान न्यूज विजन के निदेशक आलोक कुमार को मानहानि सह नोटिस भेजकर 1000 रुपये के सांकेतिक हर्जाने की मांग की है। 8 नवंबर 2026 को जारी नोटिस में उन्होंने संस्थान को 18 नवंबर तक जवाब देने का अल्टीमेटम दिया है।

पुस्तकालय रोड निवासी आकाश कुमार सिंह उर्फ राम जी सिंह का आरोप है कि न्यूज विजन ने एक खबर में उनकी पूरी पहचान को प्रकाशित नहीं करते हुए केवल ‘रामजी सिंह’ नाम का इस्तेमाल किया। साथ ही नाम के आगे सम्मानसूचक शब्द ‘श्री’ भी नहीं लगाया गया। उन्होंने इसे अपनी व्यक्तिगत गरिमा, सामाजिक प्रतिष्ठा और आत्मसम्मान से जुड़ा मामला बताया है।

नोटिस में उन्होंने नाम की अधूरी प्रस्तुति, सम्मानसूचक शब्द का इस्तेमाल नहीं किए जाने, सामाजिक प्रतिष्ठा पर कथित प्रतिकूल प्रभाव और मानसिक प्रताड़ना जैसे मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने यह भी सवाल किया है कि क्या संस्थान की पत्रकारिता में ‘श्री’ शब्द का इस्तेमाल बंद कर दिया गया है या उनके मामले में ही ऐसी चूक हुई है।

चार प्रमुख मांगें रखीं

आकाश कुमार सिंह ने नोटिस के माध्यम से संस्थान के सामने चार मांगें रखी हैं। इनमें मानसिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक सम्मान को पहुंची कथित ठेस के लिए 1000 रुपये का सांकेतिक हर्जाना, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ‘श्री आकाश कुमार सिंह उर्फ राम जी सिंह’ नाम से पूरा परिचय प्रकाशित करना, भविष्य में नाम के आगे ‘श्री’ लगाने में लापरवाही नहीं बरतना और आगामी खबरों में उनके नाम के साथ सम्मानजनक संबोधन का इस्तेमाल करना शामिल है।

नोटिस में उन्होंने स्पष्ट किया है कि 1000 रुपये की मांग आर्थिक लाभ के उद्देश्य से नहीं, बल्कि सम्मान के महत्व का एहसास कराने के लिए की गई है। साथ ही चेतावनी दी है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने और मांगें पूरी नहीं होने पर वे मामले को उच्चस्तरीय मंच तक ले जाएंगे।

फिलहाल इस मामले में न्यूज विजन संस्थान और उसके निदेशक आलोक कुमार का पक्ष सामने नहीं आया है। अब सबकी नजरें 18 नवंबर की समयसीमा और संस्थान के जवाब पर टिकी हैं।

 

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